क्या कर मुक्त है चैरिटेबल संस्थाएं?
यदि कोई NGO या कोई अन्य धार्मिक अथवा जनकल्याणी संस्था 1 करोड़ सालान आय है तो ऐसी संथाओं को यह नियम जान लेना चाहिए।
सामाजिक धर्मार्थ कार्य या जनकल्याण कार्य कर रही संस्थाएं टैक्स फ़्री होती है अर्थात ऐसे संथाओं को टैक्स नही भरना होता है।
ऐसी संस्थाएं जिनकी कुल सालाना आय एक करोड़ रुपए से कम हैं तथा वे शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में कार्यरत हैं उनकी संपूर्ण आय कर मुक्त है। ऐसी संस्थाओं को आयकर अधिनियम की
धारा 10 (23) में कर ना देने की छूट है तथा किसी भी प्रकार के रजिस्ट्रेशन एवं मान्यता की भी आवश्यकता नहीं है। उन्हें केवल आयकर की
धारा 139 (4A) में रिटर्न फाइल करना आवश्यक होता है ।
द सिटी ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की इलाहाबाद शाखा द्वारा एवं सेवा कर विषय पर आयोजित सेमिनार में सीए आशुतोष कुमार ने व्यक्त किए हैं। प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि यदि शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रही ऐसी संस्थाएं रिटर्न फाइल नहीं करती तो उन्हें ₹100 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा।
संस्थाओं की प्राप्ति एक करोड़ के ऊपर है तो मुख्य आयकर आयुक्त या डायरेक्टर जनरल से मान्यता प्राप्त करनी होती है। कर निर्धारण में ऐसी संस्थाओं को कर निर्धारण अधिकारी उनको प्राप्त छूट को वापस नहीं ले सकता बल्कि मुख्य आयकर आयुक्त को मान्यता वापस लेने के लिए लिख सकता है। जो संस्थाएं 12AA में रजिस्टर्ड हैं उन्हें 85 फ़ीसदी धन धर्मार्थ कार्यों में लगाना पड़ता है।
Comments